दीवाने
कुछ ऐसे दीवाने होते है
जो मन से परवाने होते है
जो न होते हँ बीता हुआ
कल जो कभी आ न सके
जो न होते है आने वाला कल
जिसे तुम पा न सको ,
वो होते है सिर्फ आज
जिसे पा लिया तो पा लिया
वरना वो ख्वाब पुराने होते है
कुछ ऐसे दीवाने ,,,,,,,,,
सोचता है जमाना कि जानता है उन्हें
मगर होते है वो करीब जब और
जो नही अपनाया उन्हें तब
तो वो हो जाये बेगाने कब
इस बात से वो खुद भी अनजाने होते है
कुछ ऐसे दीवाने ................................
नही समझते वो भाषा समझदारी या चतुराई कि
है ढाई अक्षर प्रेम कि उन्होंने पढ़ाई कि
पाना है उन्हें तो जलना होगा आग सा
जल जाये जो आग पर प्यार से ये वो परवाने होते है
कुछ ऐसे दीवाने ................................
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
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