Saturday, September 25, 2010

तरीका अपना अपना

तरीका अपना अपना  

इन्सान क्यों चाहता है कि
हर कोई एक दूसरे से नफरत करे
इन्सान क्यों यह चाहता है कि
हर कोई सिवा उसके किसी को न अच्छा कहे

शायद वो अपने अंदर कि
कमियों को अच्छे से जानता है
क्या है कमजोरिया उसमे
ये वो अच्छे से पहचानता है

नही चाहता वो कि उठाकर
 फायदा उन कमजोरियों का
ऐसा न हो कि कही
कोई उससे आगे निकल जाये

नही कर सकता बर्दाश्त कि
वो वजह से अपनी उन कमजोरियों की
वो कंही किसी से पीछे रह जाये

है ये तरीका एक तो
मिटाकर लाइन दूसरे की
अपनी लाइन को बड़ा किया जाये

या है दूसरा तरीका की
कर लो लाइन अपनी बड़ी इतनी की
दूसरे की लाइन छोटी रह जाये

बदकिस्मत है वो इन्सान जो
दूसरे की बजाये पहला तरीका अपनाता है
वो क्या करेगा छोटा किसी को
वो खुद ही अपनी नजर में छोटा हो जाता है

बनाने मिटाने को लकीरों के इस खेल में
मानव उस फकीर (परमात्मा) को क्यों भूल जाता है
आता है जब वो अपनी आई पर
तो वो सारी लकीरों को ही धो डालता है ई

लेखक :  प्रवीन चन्द्र झांझी

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